Thursday, 18 August 2011

असल मुद्दा क्या है ? रामलीला मैदान की मंजूरी अथवा जनलोकपाल बिल की मंजूरी ----

इस समय पुरे देश का ध्यान केवल इस बात पर है की राम लीला मैदान की मंजूरी मिली की नहीं | कांग्रेस ने लोगों का सारा ध्यान  केवल अनशन स्थल पर केन्द्रित कर दिया जबकि असल मुद्दा है लोकपाल बिल की मंजूरी, | जिसके लिए विगत तीन दिनों से एक ७४ साल का बूडा उपवास पर बैठा है , किसे फिकर है अन्ना के स्वास्थ की | सरकार ने तीन दिनों में एकबार भी लोकपाल बिधेयक का नाम नहीं लिया , वह तो इसी से खुश है की अन्ना अनशन स्थल के लिए राज़ी हो जाये | सबको अनशन स्थल की चिंता  है पर अनशन क्यूँ इस पर कोई बहस अभी तक सरकार ने  शुरू भी नहीं की | यह तो बिल्कुल उस संत की तरह हो गयी जिसे एक सिद्धि मिल गयी की उसके एक बूंद रक्त से किसी का भी रोग दूर हो सकता है| पहले तो संत ने स्वयं ही लोगों को एक-एक बूंद रक्त दिया पर जब रक्त समाप्त हो गया तब लोगों ने उस संत को पेड़ पर बाँध दिया और स्वयं ही उनका रक्त निचोड़ कर ले गए , बेचारा संत पेड़ पर टंगा रह गया | यही हाल अब अन्ना का हो रहा है , बेचारे जेल में भूखे है पर देश जश्न मन रहा है की राम लीला मैदान की मंजूरी हो गयी | वाह री  दुनिया   !!!!!!!!